उज्जैन में 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार भरभराकर गिरा, धरोहर को बड़ा नुकसान

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उज्जैन में 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार भरभराकर गिरा, धरोहर को बड़ा नुकसान
उज्जैन, मध्य प्रदेश 1 min read

उज्जैन में 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार भरभराकर गिरा, धरोहर को बड़ा नुकसान

उज्जैन का 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार भरभराकर गिर गया। पुराने महाकाल थाने के पास स्थित इस प्राचीन द्वार पर भगवान गणेश जी की प्रतिमाएं भी थीं। आसपास चल रहे निर्माण कार्यों के बीच धरोहर की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।

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उज्जैन में 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार भरभराकर गिर गया, जिससे शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह प्राचीन द्वार पुराने महाकाल थाने के समीप और सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के आसपास स्थित बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह ऐतिहासिक महाकाल द्वार पुराने समय में महाकाल मंदिर और पुराने शहर के बीच आने-जाने वाले मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा था। श्रद्धालु इस मार्ग के चढ़ाव से महाकाल मंदिर की ओर से पुराने शहर की तरफ आते-जाते थे। द्वार पर भगवान गणेश जी की प्राचीन प्रतिमाएं भी स्थापित थीं।

आसपास चल रहे निर्माण और विकास कार्यों के बीच इस प्राचीन संरचना के क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है। इसके बाद अचानक द्वार का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। घटना ने उज्जैन की ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

14वीं शताब्दी से जुड़ा बताया जा रहा है द्वार

स्थानीय जानकारी के अनुसार, यह द्वार करीब 14वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। उज्जैन प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी होने के कारण यहां मौजूद पुराने मंदिर, द्वार, मार्ग और स्थापत्य शहर की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

द्वार पर थीं भगवान गणेश जी की प्रतिमाएं

इस प्राचीन द्वार की एक खास पहचान यहां लगी भगवान गणेश जी की प्रतिमाएं थीं। द्वार के स्थापत्य में दिखाई देने वाली प्राचीन कलाकृतियां और धार्मिक प्रतिमाएं इसे सामान्य रास्ते से अलग बनाती थीं।

निर्माण कार्यों के बीच धरोहर की सुरक्षा पर सवाल

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर में चल रहे विकास और निर्माण कार्यों के दौरान प्राचीन संरचनाओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सावधानी बरती जा रही है या नहीं। शुरुआती जानकारी में आसपास चल रहे निर्माण कार्यों के बीच द्वार के क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है। हालांकि, द्वार गिरने के वास्तविक कारणों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।

उज्जैन की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी थी धरोहर

उज्जैन को देश की प्रमुख प्राचीन धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां महाकाल मंदिर और पुराने शहर से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थल इसकी पहचान का हिस्सा हैं। ऐसे में किसी प्राचीन संरचना का क्षतिग्रस्त होना स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय है।

विकास कार्य शहर के लिए जरूरी हैं, लेकिन उज्जैन की ऐतिहासिक धरोहरों और प्राचीन स्थापत्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस घटना के बाद उम्मीद है कि संबंधित विभाग प्राचीन संरचनाओं की स्थिति और आसपास चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।

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